Sunday, 18 August 2013

सावधान रहने की जरुरत है भाजपा और मोदीजी को.



हम देख रहे है की पिछले कही महिनो से अमरिका,ब्रिटन और औस्ट्रेलिया जैसे देश मोदीजी के लिये तारिफ़ो के पुल बांध रहे है,अमरिका के सांसदो का शिष्ट मंडल आकर मोदीजी को मिलता है, ब्रिटन के सांसद मोदीजी को ब्रिटन के common house मे बोलने का निमंत्रण दे जाते है और औस्ट्रेलिया का राजदुत तो मोदीजी को औस्ट्रेलिया का दौरा करने को कहकर जाता है ,जिससे उपरी तौर पर ये दिखे की इन देशो ने मोदीजी का लोहा माना हो पर यह महज दिखावा भी हो सकता है.कारन इसी प्रकार इन देशो ने २००४ मे भी अटलजी की और उनके सरकार की तारीफ़े कर करके भाजपा को हवा मे चढा दिया था जिसका परीणाम ये हुआ कि भाजपा को सत्ता से हाथ धोना पडा .

२००४ के आम लोकसभा चुनाव मे ज्यादा नही भाजपा सिर्फ़ ९ सिटो से पिछे रही थी कांग्रेस से ,कांग्रेस-१४६ और भाजपा-१३७ यानी कांग्रेस को सत्ता स्थापन का न्योता मिला और कांग्रेस ने छोटी-बडी पार्टीय़ो के साथ मिलकर सत्ता बनायी मतलब साफ़ है की कांग्रेस को १ सिट भी भाजपा से ज्यादा हो तो सत्ता हासिल करने का मौका मिल जायेगा जो २००४ मे हुआ .

भाजपा को २००४ का दुख रहा है की अटलजी के अच्छे कामो के बावजुद सत्ता गयी शायद भाजपा को लगता होगा कि तहलका सिड़ि,शाइनिंग इण्डिया जैसा नकारत्मक प्रचार ही इसका कारण् होगा सत्ता जाने के लिये ? तो भाजपा को जानना पडेगा की यह भी एक पह्लु था जिससे देश के लोगो को गुमराह करने के लिये चलाया गया था और इस तहलका सिडि और शाइनिंग इण्डिया के पिछे विदेशियो संस्थाओ की हि नितिया काम कर रही थी जो सफ़ल भी हो सकी थी २००४ मे और इन संस्थाओ के आका यही देश है जो उस वक़्त अटलजी कि तारिफ़ कर रहे थे और आज मोदीजी की.

पर असली कमाल तो उस वक़्त यह था कि तहलका सिडि और शाइनिंग इण्डिया प्रचार की आड मे विदेशी ताक़ते भाजपा को सत्ता से दुर रखने के लिये अंदर से कांग्रेस को ज्यादा सिटे देने के काम मे लगी थी, जो भाजपा के जहन मे उस वक़्त आया हि नही होगा, क्यु की विदेशो मे अटलजी के सरकार कि स्तुति सुमन गाये जा रहे थे और अंदर से भाजपा को सत्ता से दुर रखने के लिये शतरंज की कौडिया बिछाइ जा रही थी विदेशो मे बैठे ताक़तो द्वारा.हलाकि विदेशियो को पता है की ,भारत मे भाजपा कि सत्ता होगी तो उनकी कुछ नही चल सकती पर कांग्रेस हो तो भारत से कई प्रकार के लाभ उठाये जा सकते है

अमरिका,ब्रिटन और औस्ट्रेलिया जैसी विदेशी ताक़ते चाहती है कि कांग्रेस सत्ता मे बनी रहे और भारत के प्राक्रुतिक संसाधनो का लाभ मिल जाये इन देशो को,वैसे ये देश भारत का हर द्रुष्टि से लाभ उठाना चाहेंगे जैसे अंतरराष्ट्रिय राजनिति ,सामरिक ,व्यापार ,आयात-निर्यात आदी जो कांग्रेस के राज मे हि मिल सकता है पर भाजपा के राज मे नही कारण भाजपा एक राष्ट्रवादि संघटन है जो विदेशी ताक़तो के हाथो का खिलोना नही बनना चाहती और ये इन विदेशी ताक़तो को गवारा नही होगा ,इसलिये इनको तो सिर्फ़ कांग्रेस की सत्ता ही पसंद रहेगी अपनी नितियो को चलाने हेतु.

इसलिये अबकी बार सावधान रहने की बेहद जरुरत है भाजपा और मोदीजी को.

Thursday, 13 June 2013

नितीश कुमार के लिए १९९६ के पहले अटलजी ,अडवानीजी और सुशिल मोदीजी जो साम्प्रदायिक थे पर वही तीनो १९९६ के बाद धर्मनिरपेक्ष कैसे बन गए ? तथा नितीश कुमार के लिए २००२ के बाद सिर्फ नरेन्द्र मोदीजी साम्प्रदायिक बन गए पर भाजपा मात्र धर्मनिरपेक्ष पार्टी कैसे बनी रही ?



देश की जनता को यह जानना होगा की , नितीश कुमार ऐसे राजीनीतिज्ञ है जो सत्ता में हमेशा बने रहने के खेल में माहिर है . १९९२ में नितीश कुमार जनता दल में थे और लालू प्रसाद यादव के साथी तथा तत्कालीन प्रधानमंत्री वि पि सिंह के मंत्री मंडल में कृषि राज्य मंत्री थे ,उसी काल में राममंदिर आन्दोलन उफान पर था तो इस आन्दोलन का विरोध करते हुए नितीश कुमार के तत्कालीन साथी और बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने राम मंदिर निर्माण के लिए जो रथयात्रा श्री लालकृष्ण अडवाणीजी के नेतृत्व में चल रही थी उसे बिहार में रोका था और श्री लालकृष्ण अडवाणीजी को गिरफ्तार किया था तब नितीश कुमार तत्कालीन अपने साथी लालू प्रसाद के साथ तो थे ही पर अडवाणीजी के भी विरोध में थे और तो और समाजवादी विचारो वाले नितीश कुमार संघ के भी विरोध में थे कारण हर समाजवादी मानता है की संघ जातीयवादी तथा धार्मिक संघठन है ,इसलिए श्री लालकृष्ण अडवाणीजी उसी संघ के स्वयंसेवक है एवं पूर्व में प्रचारक भी रहे थे इसलिए नितीश कुमार उनके भी विरोधक थे और अडवाणीजी को साम्प्रदायिक मानते रहे थे . पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी भी संघ के प्रचारक रहे है और भाजपा श्रेष्ठ नेता थे जो राम मंदिर आन्दोलन में सम्मिलित होने के कारण समाजवादि नितीश कुमार के नजरो में खलनायक रहे है इसलिए नितीश कुमार अटलजी के भी विरोधक थे और अटलजी को साम्प्रदायिक माना करते थे .इन्ही दोनों भाजपा के शीर्ष नेताओ की तरह बिहार के विद्यमान उपमुख्यमंत्री सुशिल कुमार मोदी भी संघ के प्रचारक रहे है और राममंदिर आन्दोलन में सक्रिय सामिल थे इसलिए नितीश कुमार उनके भी विरोधक रहे है उन्हें भी साम्प्रदायिक माना करते थे, पर भाजपा के इन तीनो नेताओ को नितीश कुमार ने १९९६ के पहले साम्प्रदायिक माना था ,कारण १९९६ के बाद नितीश कुमार की पार्टी ने भाजपा के साथ गठजोड़ किया था इसलिए १९९६ के बाद भाजपा के ये तीनो नेता नितीश कुमार के लिए धर्मनिरपेक्ष बने ....

नितीश कुमार भारतीय राजनीती में शातिर राजनीतिज्ञ माने जाते है ,जिन्हें सत्ता में बने रहने में महारत हासिल है जो १९९० से अब तक कुछ एक ५-६ साल छोड़ दिए जाए तो हमेशा सत्ता में शीर्ष के पद पर रहे है,१९५१ में जन्मे बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार को धर्मनिरपेक्षता के संस्कार और राजनीती के पाठ उनके पिताजी कविराज रामलखन सिंह से मिले हुए है जो १९५७ के पहले राष्ट्रीय कांग्रेस के बिहार में एक बड़े नेता थे तथा कांग्रेसी नेता अनुग्रह नारायण सिन्हा के कट्टर समर्थक(शिष्य ) थे ,पर १९५२ और १९५७ के आम चुनावो में कांग्रेस का टिकट ना मिलने के कारण कांग्रेस छोड़कर जनता पार्टी में सामिल हुए बाद में अपने सुपुत्र नितीश कुमार को भी जनता पार्टी में लाकर अपने गुरु अनुग्रह नारायण सिन्हा के पुत्र सत्येन्द्र नारायण सिन्हा से जोड़ दिया जो पूर्व में कांग्रेसी थे पर उस काल में जनता पार्टी बिहार राज्य के अध्यक्ष थे ......... फिर क्या अपने पिताजी की मदत से १९७५ में राजनितिक जीवन शुरू करने वाले नितीश कुमार १९८० में बिहार विधानसभा का चुनाव लड़कर हार गए बाद में १९८५ में विधायक बने ,१९८७ में बिहार युवा लोकदल के अध्यक्ष ,१९८९ में बिहार जनता दल के महामंत्री और लोकसभा सांसद ,१९९० में भाजपा के समर्थन पर चल रहे वि पि सिंह के मंत्रिमंडल में केंद्रीय कृषिराज्य मंत्री , १९९६ में भाजपा से गठबंधन करने के बाद १९९८ में अटलजी के मंत्रिमंडल में रेल मंत्री २००४ तक केंद्र में मंत्री बाद में २००५ में भाजपा की मेहरबानी से मुख्यमंत्री बने जो आज तक मुख्यमंत्री है .

नितीश कुमार जानते है की उन्हें जो अब तक सत्ता में जो बड़े बड़े पद मिले है वो गठबंधन की राजनीती के कारण .१९८९ से आज तक जो भी बड़ा पद प्राप्त हुआ है नितीश कुमार को वो गठबंधन की सरकारों में ,वे अपने पार्टी के माध्यम से अकेले सत्ता हासिल नहीं कर सके है ,उन्हें हर बार भाजपा का साथ लेना ही पड़ा उसमे भी उन्हें अटलजी ,अडवाणीजी और सुशिल मोदीजी का साथ मिला है जो गठबंधन की राजनीती को मानते है .इसलिए नितीश इन तीनो नेता को अपने हिसाब से धर्मनिरपेक्ष मानते होंगे .

पर नितीश कुमार ये भी जानते है की गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदीजी गठबंधन के राजनीती के बजाय शत प्रतिशत भाजपा की राजनीती पर ही चलते है ,उसका उदहारण यह है की मोदीजी १९८७ में संघ से भाजपा में आये गुजरात के संघठन महामंत्री के रूप में .मोदीजी ने पहला चुनाव व्यवस्थापन अहमदाबाद महानगरपालिका में अपने हाथ में लिया जिसमे भाजपा ने राज्य में मित्र पक्ष जनता दल को अहमदाबाद महानगरपालिका के चुनाव में साथ न लेकर खुद भाजपा का बहुमत हासिल किया और बाद में पुरे राज्य में भी यही प्रयोग जारी रखते हुए १९९५ में भाजपा को दो तिहाई बहुमत हासिल कराया , उसका परिणाम यह निकला की गुजरात राज्य से जनता दल खत्म हुआ तथा कांग्रेस ख़त्म होने की कगार पे है और आज ग भाजपा की अकेले दम पर आज तक गुजरात विधान सभा में बहुमत के साथ सत्ता है ,इसी १९८७ से १९९५ के बिच नितीश कुमार जनता दल में ही थे जिन्होंने अपने पार्टी को गुजरात में ख़त्म होते हुए देखा है मोदीजी के चुनाव रणनीति के कारण .

नितीश कुमार मानते है की अगर मोदीजी भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बन जाते तो स्वाभाविक रूप से मोदीजी के हाथ भाजपा की कमान आ जाएगी जिससे यह होगा की भाजपा के मित्र पक्ष जिसमे जदयु भी है वो सभी का अस्तित्व धोके में आ जाएगा और तो और अगर मोदीजी प्रधान मंत्री बन गए तो आने वाले १५ से २५ साल तक भाजपा की सत्ता बनी रहेगी जिससे भाजपा के सभी मित्र पक्ष शायद ख़त्म हो जायेंगे मोदीजी के लगातार प्रभाव के कारण .

इसलिए नितीश कुमार भाजपा के ऐसे नेताओ को समर्थन देना चाहते है जो गठबंधन की राजनीती के समर्थक है जिनमे अटलजी ,अडवाणीजी और सुशिल मोदीजी है जिन्हें धर्मनिरपेक्ष बताते है नितीश कुमार, पर नितीश कुमार को मोदीजी साम्प्रदायिक इसलिए दिखाई देते है कारण अगर मोदीजी को कमान मिलती है भाजपा की तो नितीश कुमार का अस्तित्व ही धोके में आता दिखाई देता है .......
 

Thursday, 21 February 2013

देश और दुनिया के मुस्लिम विद्वानों और धर्म गुरुओ के किसी भी सर्टिफिकेट की जरुरत नहीं है मोदीजी को , सर्टिफिकेट तो गुजरात के राष्ट्रवादी मुस्लिम भाइयो ने मोदीजी को दे दिया है ...........



कुछ मुस्लिम विद्वान् और धर्म गुरु ,देश और दुनिया में अपने कर्तुत्व से परचम लहरा रहे नरेन्द्र मोदीजी के द्वारा गुजरात में किये हुए विकास को तो अब कैसे वैसे मानने लगे है पर उस विकास को दुय्यम बताते हुए 2002 गुजरात के दंगो में दंगा पीड़ित लोगो को मिलने वाले इंसाफ को प्राथमिकता देकर कह रहे है की "वहां के विकास का क्या मतलब जहा इंसाफ नहीं " याने गुजरात में विकास तो रहा है पर अल्पसंख्यांक लोगो को इंसाफ नहीं मिल रहा है इस कारन मोदीजी के विकास के कोई मायने नहीं है ऐसा मुस्लिम विद्वानों और धर्म गुरुओ का मानना है .

अब इन विद्वानों और धर्म गुरुओ को कौन समजयेगा की देश भर में आजादी के बाद कांग्रेस और दुसरे पार्टियों(कम्युनिस्ट ,सपा ,बसपा ,जनता दल आदि ) के शासन काल में जितने दंगे हुए उनमे दंगा पीडितो को कितना इन्साफ मिला ये जानने की कोशिश क्यों नहीं की इन विद्वानों और धर्म गुरुओ ने ?2002 के दंगे के पूर्व गुजरात में जितने दंगे हुए जो कांग्रेस के काल में ही हुए थे ,उन दंगो में सिर्फ 4/5 से ज्यादा यफ आय आर भी दर्ज नहीं किये गए थे जबकि गुजरात 2002 में सभी जगहों में हुए दंगो में सम्मलित दंगाई यो पर हजारो केस तो दर्ज किया ही किया पर साथ में उनके खिलाफ साबुत भी पेश किये गए मोदीजी के सरकार ने ,जिससे अब तक सेकड़ो दंगायियो को सजा भी मिल चुकी है फिर उसमे मुस्लिम ही नहीं बल्कि मुस्लिमो से ज्यादा हिन्दू दंगाई भी है जिन्हें कड़ी सजा मिल चुकी है और कही तो न्यायलिन प्रक्रिया से गुजर भी रहे और उन्हें उनके गुनाह के लिए सजा भी मिलने वाली है ,इन सभी इन्सफो के बाद भी मुस्लिम विद्वान इन्साफ मिल रहा है ऐसा मानने को तयार नहीं है तो उनका दुर्भाग्य होगा पर गुजरात के मुस्लिमो का सौभाग्य जरुर है कारन उनको इन्साफ भी मिल रहा है और उनका विकास भी हो रहा है दुनिया में रह रहे सभी मुस्लिमो की तुलना में .......

आखिर,में इतना ही कहना चाहूँगा की मुस्लिम विद्वान और धर्मगुरुओ के सर्टिफिकेट की जरुरत नहीं है मोदीजी को ,आखिर सर्टिफिकेट तो गुजरात के उन राष्ट्रवादी मुस्लिमो ने दे ही दिया है मोदीजी को जिन्होंने 2002 दंगे में इन्साफ पाया है और विकास का भी अनुभव लिया है .......अब तक मुस्लिम भाइयो को धर्म के नाम पर राष्ट्र से अलग रखने वाले मुस्लिम विद्वान और धर्म गुरुओ को बहोत बड़ी चपट दे दी है मुस्लिम भाइयो ने राष्ट्रवाद के प्रवाह में सामिल होकर,गुजरात में मोदीजी को और गुजरात के मुस्लिम बहुल स्थानीय निकायों में भाजपा को बड़े तादात में वोट दिया और चुनकर लाया ......इससे बड़ा और कौनसा सर्टिफिकेट हो सकता है मोदीजी को ?

Monday, 20 August 2012

बारूद पर खडा आसाम .....



आसाम के दंगो के बाद देश भर में निर्माण हुए तनाव पूर्ण स्थिति के लिए पाकिस्तान ही जिम्मेवार है ऐसा केंद्र की कांग्रेस सरकार ने बयान दिया , बहोत हद तक सही भी है पर आसाम में धार्मिक तनाव को पैदा होने के पीछे के कारण और जिम्मेवार जो है उसपर आसाम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई को छोड़ कोई कांग्रेसी नेता बात नहीं कर रहा है ,कांग्रेस ने जो पेरा था उसको आज तरुण गोगो

ई को चुनना पड़ रहा है इसलिए उन्होंने आसाम में सक्रिय मुस्लिम चरमपंथी संस्थाओ पर बंदी की मांग की है जो भाजपा की भी पिचले ५-६ सालो से मांग रही है ,कारण अटलजी के काल में ही बंगलादेशी घुसपेठ और उनको बढ़ावा देने वाली गतिविधियों पर अटल सरकार की नज़र थी और अंकुश था .अटल सरकार के गहरी नज़र के कारण ही आसाम ,त्रिपुरा और मणिपुर में सक्रिय मुस्लिम चरमपंथियों की गतिविधियों पर अंकुश लगा हुआ था.पर अटलजी की सरकार जाते ही पाकिस्तान के ISI और बंगलादेशी आतंकी संस्थाओ के मदत से कुछ चरमपंथी संस्थाए स्थापित हुयी और आसाम में भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने लगी ,जो कांग्रेस मुस्लिमो के वोटो के लिए नज़र अंदाज़ करते आयी है,उससे बड़ी बात तो यह है की इन चरमपंथी संस्थाओ की पैरवी करने वाली और आसाम के सत्ता में कांग्रेस के साथ सामिल UDF (united democratic front ) नाम की मुस्लिम परस्त पार्टी जिसके १८ विधायको का समर्थन आसाम कांग्रेस सरकार को मिला हुआ है .

अगर आज के कांग्रेस सरकार को इस तनाव वाली स्थिति से निपटना है तो आसाम ,त्रिपुरा ,मणिपुर के सभी मुस्लिम चरमपंथी संस्थाओ पर अंकुश लगाना होगा और आसाम ,त्रिपुरा ,मेघालय राज्य से सटे बंगलादेश सीमाओं को सिल कर देना होगा जिससे की बंगलादेशी घुसपेठी को भारत में इस मार्ग से आने का मौका ही ना मिले और यह काम हुआ भी था अटलजी के काल में ,अटलजी के सरकार ने बंगलादेश और भारत के सीमा को तारो के बेडो से सिल करने की कवायत शुरू भी कर ली थी पर २००४ को अटलजी की सरकार जाते ही उन सीमाओं पर ढिल बरती गयी कारण बंगलादेश से आये हुए बंगलादेशी मुस्लिम भारत में बस जाये और कांग्रेस के वोटर बने रहे ऐसा कांग्रेस चाहता है इसलिए आज आसाम में बंगलादेशी घुसपेठियो की वजह से जो दंगे हो रहे है और उन दंगो के बाद जो स्थिति पैदा हुयी है पुरे देश में उसके लिए सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस ही जिम्मेवार है .

आसाम में सक्रिय इस्लामी चरमपंथी संस्थाए

1. MSCA- मुस्लिम सिक्यूरिटी कौंसिल ऑफ़ आसाम .
2. ULMA- युनाईटेड लिबरेशन मिलिशिया ऑफ़ आसाम .
3. ILAA- इस्लामिक लिबरेशन आर्मी ऑफ़ आसाम .
4. MVF- मुस्लिम वोलिन्टर फाॅर्स .
5. MLA- मुस्लिम लिबरेशन आर्मी .
6. MSF- मुस्लिम सिक्यूरिटी फाॅर्स .
7. ISS- इस्लामिक सेवक संघ .
8. IURPI-इस्लामिक युनाईटेड रेफोर्मेशन प्रोटेस्ट ऑफ़ इंडिया .
9. RMC- रेवोलुश्नरी मुस्लिम कोमान्डोस .
10.MTF- मुस्लिम टाईगर फाॅर्स .
11.MLF- मुस्लिम लिबरेशन फ्रंट .
12.MLTA- मुस्लिम लिबरेशन टाईगरस ऑफ़ आसाम .
13.MULFA- मुस्लिम युनाईटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ़ आसाम .
14. MULTA-मुस्लिम युनाईटेड लिबरेशन टाईगरस ऑफ़ आसाम .

त्रिपुरा और मणिपुर में सक्रिय मुस्लिम चरमपंथी संस्थाए .

1.INF- इस्लामिक नेशनल फ्रंट .
2.UILA- युनाईटेड इस्लामिक लिबरेशन आर्मी.
3.UIRA- युनाईटेड इस्लामिक रेवोलुश्नरी आर्मी
4.PULF- पीपल्स युनाईटेड लिबरेशन फ्रंट .

Thursday, 26 July 2012

कश्मीरी हिन्दू पंडितो को न्याय ना दे सकने वाली जम्मू- काश्मीर पेंथर पार्टी आसाम के अप्रवासी बंगलादेशी मुस्लिम और मारे जा रहे म्यानमारी(बर्मा ) मुस्लिमो को न्याय देने के लिए कश्मीर में प्रदर्शन कर रही है ...



मुझे तब हंसी आती  है जब कोई अपने घर  का अन्धेरा छोड़कर और के घर में उजाला है की नहीं इसकी फिक्र करता है ,और वाकई में ये जुमला लागु पड़ता  है जम्मू-काश्मीर पेंथर पार्टी  पर ,कल इस पार्टी के लोगो ने श्रीनगर में आसाम में पीठ रहे अप्रवासी बंगलादेशी मुस्लिम और  बर्मा के शासको द्वारा मारे जा रहे म्यानमारी मुस्लिमो के समर्थन में प्रदर्शन किया और मांग रखी की,  आसाम दंगा पीड़ित  अप्रवासी बंगलादेशी मुस्लिम और म्यानमार(बर्मा ) में मारे जा रहे मुस्लिमो को न्याय मिलाकर देने के लिए  भारत में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति प्रयास  करे......हँसे की रोये इनपर ये भी तय करना मुश्किल है ......

 इस पार्टी का अस्तित्व ऐन केन जम्मू  में और काश्मीर के कुछ मुहल्लों तक सिमित है, कल तक यह पार्टी जम्मू के लोगो की रहनुमा के तौर पे इतराती थी ,पर जम्मू-काश्मीर के विधान सभा चुनाव में भाजपा ने इस पार्टी को जम्मू से पूरी तरह धो डाला और कही का भी नहीं छोड़ा ,अब एकाद दो विधायको के बल पर फिर से जम्मू और नए से मुस्लिम का  तुष्टिकरण करते हुए काश्मीर  में अपनी पैठ बैठने की कवायत जारी है इस पार्टी की ,और इसीके तहत तुष्टिकरण का तमाशा कर रही है JKPP , जम्मू कश्मीर के पिचली सरकार में ये पार्टी मुफ्ती मोहमद के PDP के साथ सत्ता में थी और इनके अध्यक्ष भीम सिंह मंत्री भी थे उस सरकार में ,अपने आप को सोशलिस्ट (समाजवादी ) कहलाने वाली ये पार्टी मुलायम के  समाजवादी पार्टी की तरह ही है जो यादवो का प्रतिनिधित्व करती है पर वोटो के लिए मुस्लिमो का तुष्टिकरण भी करती है ,उसी तरह JKPP भी गैर काश्मीरी जम्मू वासियों का प्रतिनिधित्व करने का अब तक दम भरती थी और अब मुस्लिमो के वोटो को पाने के लिए उनका तुष्टिकरण शुरू कर दिया है इस पार्टी ने  और कर्म संयोग से  मुलायम के  समाजवादी पार्टी  और जम्मू-काश्मीर पेंथर पार्टी  का चुनाव चिन्ह भी एक ही है वो "साईकिल " .

कल किये हुए प्रदर्शन में इस पार्टी के लोगो ने मुस्लिमो को खुश करने के लिए अमरीका और इस्राईल के खिलाफ घोषनाये दी जैसे की कभी कभी  मुलायम की समाजवादी पार्टी करती  है जिससे की मुस्लिम भी खुश होते है और वोट भी देते है .इस पार्टी के लोगो ने प्रदर्शन में आसाम के दंगा पीड़ित  अप्रवासी बंगलादेशी मुस्लिम और म्यानमारी(बर्मा ) में मारे जा रहे मुस्लिमो को भारत के राजकर्ताओ से मदत हो ऐसी मांग करते हुए दंगा पीड़ित अप्रवासी बंगलादेशी मुस्लिमो को मुआवजा मिले और म्यानमार(बर्मा ) से भागे हुए मुस्लिमो को शरण मिले ऐसी मांग करी  और  इस प्रदर्शन में JKPP  ने आसाम सरकार को बरखास्त करके राष्ट्रपति शासन लागु करने की मांग रखी है .

अब ये तो होने से रहा की देश के दुसरे कोने के राज्य के एक प्रान्त की  क्षेत्रीय   पार्टी द्वारा देश के दुसरे कोने के राज्य की सरकार को बरखास्त करने की मांग रखे  और वो पूरी हो ,पर इससे एक बात मेरे जैसे काश्मीरी पंडितो का दर्द अपना दर्द मानने वाला  जानता है की कल तक काश्मीरी पंडितो को न्याय मिलाकर देने का दम भरने वाली JKPP आज उसी काश्मीर में मुस्लिम बहुल श्रीनगर में मुस्लिमो को खुश करने  के लिए अव्यवहारिक मांगे रख रही थी , इनको ये कौन समजायेगा की  बंगलादेशी मुस्लिमो और म्यानमारी(बर्मा ) मुस्लिम भारत के नागरिक नहीं है और इस्राईल,अमरीका को  काश्मीर ,आसाम ,बंगलादेश और म्यानमार की क्या पड़ी है ,पर नहीं मुस्लिमो को जो खुश करना है तो दो गाली उन्हें  जिन्हें पूरी दुनिया के मुस्लिम गालिया देते है और आखरी बात JKPP कुछ ना कर पायी है अब तक  काश्मीरी पंडितो के लिए ,मगर विरोधाभास देखे की , काश्मीर की समस्या का हल किये बिना ही  दुसरे  राज्य  में  पीड़ित वो भी मुस्लिम  धर्म विशेष और तो और दुसरे राष्ट्रों से अप्रवासी के तौर पे आये हुए लोगो को न्याय देने की बात करना काश्मीरी पंडितो के जख्मो पर नमक रगड़ने वाली बात नहीं है तो क्या है  ? अब तक अल्पसंख्यांक तुष्टिकरण सूना था पर काश्मीर के बहुसंख्यानको (मुस्लिम)का भी तुष्टिकरण भी किया जा रहा है, ये तो सोचने वाली बात हो गयी है की तुष्टिकरण किया तो जा रहा है पर एक ही धर्म का क्यों ?

नोट -इस लेख को लिखने का कारन  यही है  की मेरे अपनों की समस्या का हल किये बगैर हम पड़ोसियों के समस्याओ की क्यों सोचे उसी तरह जम्मू-काश्मीर पेंथर पार्टी ,काश्मीर के अन्दर  काश्मीरी पंडितो को काश्मीर में बसाने के लिए काम करे नाकि दुसरे राज्यों की समस्या में अपना राजनितिक लाभ सोचे . 

Tuesday, 17 July 2012

कोई भी मीडिया या अखबार वाला एक  बाप की औलाद है,अपने माँ का दूध पिया हो और  विदेशी या 10 जनपथ के टुकड़ों पर नहीं पल रहा या नहीं भोंक रहा है तो सोनिया और राहुल गाँधी को अपने टी वी स्टूडियों में बुला कर दिखाए इनकी स्वतंत्र प्रेस वार्ता करवाकर दिखाए ??

इनकी पढ़ाई-लिखाई से ले कर विदेश यात्राओं और दोहरी नागरिकता तक सारे सवाल पूछे ?

सोनिया और राहुल कौन से धर्म की पूजा करते हैं ? वो आतंकवादियों के मरने पर क्यों रोते हैं ? और हिन्दू धर्म को सबसे खतरनाक क्यों समझते हैं , राहुल गाँधी हिन्दुओं को क्यों आतंकवादी बताते हैं ?

इनसे पूछे की भारत के उज्जवल भविष्य के लिए ये क्या सोचते हैं इन्होने व्यक्तिगत रूप से अभी तक भारत के लिए क्या क्या विकास योजनायें सुझायी है ?


इनकी कितनी इनकम है ,कितना इनकम टेक्स भरते हैं ? सोनिया गाँधी ने किन किन दस्तावेजों के आधार पर अपना वोटर आई डी कार्ड बनवाया है ?

राहुल गांधी ने कितनी पढाई की और उसके प्रमाण पत्र कहाँ हैं ?...काले धन को लाने और लोकपाल को बनाने में उनकी व्यक्तिगत राय क्या है ?

राजीव गाँधी ट्रस्ट हर साल भारत से कितने हज़ार करोड़ रूपये की उगाही कर रहा है और वो पैसा कहाँ ले जाया जा रहा है राजीव गाँधी ट्रस्ट को आर टी आई (सूचना के अधिकार कानून) के दायरे में क्यों नहीं लाया गया आदि ?

और अगर वो ऐसे सवालों के जवाब देने या स्वतंत्र प्रेस वार्ता करने या ये सब बाते बताने से मना करते हैं तो आप उसे ब्रेकिंग न्यूज़ बना कर चलायें की हमारे चेनल पर या हमारे अखबार को भारत के टेक्स पर जी रहे दौ सांसदों ने आने व बताने से मना कर दिया जो की हमारे ही टेक्स के पैसों पर अपनी तनख्वा पाते हैं और जनता द्वारा चुने गए हैं ...अगर किसी भी मीडिया वाले के पास थोड़ी सी भी हिम्मत या इन्सानियत बाकी है तो कृपया बिना दलाली के ये कार्य कर के दिखाए ??? 

Monday, 16 July 2012

हिन्दुओ में ही "विविधता में एकता है" दुसरे धर्मो की तुलना में .........
"हिन्दुओ में एकता नहीं है "कहने वाले ये देखे और फिर कहे की ,किसमे एकता है और किस्मे नहीं ?

इसाई
• एक यशु,
• एक बायबल ,
• एक जेहोवा
•एक धर्म.....!
ईसाई धर्म में एकता है ?
पर
• लाटिन कैथोलिक प्रवेश नहीं कर सकते सिरियन कैथोलिक चर्च में .
• ये दोनों प्रवेश नहीं कर सकते मर्थोमा चर्च में .
• ये तीनो प्रवेश नहीं कर सकते पेंटेकोस्ट चर्च में .
• ये चारो प्रवेश नहीं कर सकते सल्वाशन आर्मी चर्च में .
• ये पांचो प्रवेश नहीं कर सकते सेवेंथ डे याडवेंटिस्ट चर्च में .
• ये छह प्रवेश नहीं कर सकते ओर्थोडोक्स चर्च में .
• ये सातो प्रवेश नहीं कर सकते जाकोबिट चर्च में .
• प्रोटेसटन ख्रिश्चन और रोमन कैथोलिक में मार काट होती रही है हजारो सालो से .
•ऐसे ही , अलग अलग १४६ जातिया है केरला के ईसाई समुदाय में ,
• ये सभी एक दुसरे के चर्चो में जा नहीं सकते .. !

फिर भी

•एक येशु ,
•एक बायबल ,
•एक जेहोवा .....
क्या यही एकता है ईसाइयत में ?
*
*
*
*


इस्लाम
•एक अल्लाह ,
•एक कुरान ,
•एक नेबी .
•एक धर्म....!
पुरे इस्लाम में एकता है ?
पर

•शिया और सुन्नी एक दुसरे का कत्ले आम करने में मशरूफ है सभी मुस्लिम राष्ट्रों में .
•सभी मुस्लिम राष्ट्रों में इन दोनों समुदायों में हजारो सालो से दंगे होते आये है .
• शिया समुदाय के अनुयायी सुन्नी मस्जिदों में प्रवेश नहीं कर सकते .
•ये दोनों अहमदिया मस्जिदों में प्रवेश नहीं कर सकते .
•ये तीनो सूफी मस्जिदों में प्रवेश नहीं कर सकते .
•ये चारो मुजाहिद्दीन मस्जिदों में प्रवेश नहीं कर सकते .
इसी तरह
•इसी प्रकार १३ जातिया है इस्लाम में .
•आपस में दंगे करना / बोम्ब ब्लास्ट करना / वर्चस्व के लिए लड़ना / कत्लेआम करना /ये तो परंपरा रही है इनकी .
•जब अमरीका ने इराक और अफगानिस्तान पर हमला किया था तब इन दोनों देशो के पडोसी पर मुस्लिम मुल्को ने ही अमरीका की मदत की थी जिसमे पाकिस्तान ,सौदी अरबिया आदि थे.
•सभी मुस्लिम आतंकवादी नहीं है पर सभी आतंकवादी मुस्लिम कैसे है ?
दुनिया की ८० % आतंकवादी संस्थाए इस्लाम के लिए जिहाद के नाम पर आतंक फ़ैलाने का काम कर रही है .
•पूरी दुनिया में अतंकवादियो के आतंक से पीड़ित 60% लोग खुद मुस्लिम ही है .....!

फिर भी

एक अल्लाह ,
एक कुरान ,
एक नेबी ....!
क्या ये इस्लाम की एकता है ?
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हिन्दू :
•३३ करोड़ देवता .
•१,२८० धार्मिक पुस्तके .
•१०,००० भाष्य .
•एक लाख से ज्यादा उपभाष्य
दर्ज है इन पुस्तकों में .
•असंख्य आचार्य होकर गए गए .
•हजारो ऋषि ,मुनि होकर गए .
•सेकड़ो भाषाए है हिन्दुओ में .
•अनेको जाती और उपजाति है .
पर सभी को हिन्दुओ के मंदिरों में प्रवेश मिलता है

ये हिन्दुओ की एकता नहीं है तो क्या है और धर्मो की तुलना में ?
•हिन्दुओ ने कभी मारकाट /बोम्ब ब्लास्ट /हत्याकांड /कत्लेआम / नहीं किया है अपने धर्म के नाम पर, जैसे और धर्मो के अनुययियो ने किया है हर बार .
•हिन्दुओ ने हमेशा दुसरे धर्मो का आदर ही किया है ,इसलिए हिंदुस्तान में सभी धर्म के अनुयायी बस पाए है .
•हिन्दू हमेशा शांति के पक्षधर रहे है
•हिंदुत्व का मतलब जीवन को विविध पद्दति से जीना नाकि और धर्मो की तरह एक ही भगवान् ,एक ही पुस्तक और एक ही प्रकार की मान्यताओ के आधीन होकर जीना .
•हिन्दू धर्म नहीं है बल्कि विविधता से भरी जीवन पद्दति है .
•हिन्दू हमेशा परिवर्तनशील ही रहा है .



"धर्मो रक्षति रक्षितः "
अगर आप धर्मं की रक्षा करेंगे , तो धर्मं आपकी रक्षा करेगा ...........


आपका -
उदार मन का सच्चा हिन्दू ...............