Sunday, 18 August 2013

सावधान रहने की जरुरत है भाजपा और मोदीजी को.



हम देख रहे है की पिछले कही महिनो से अमरिका,ब्रिटन और औस्ट्रेलिया जैसे देश मोदीजी के लिये तारिफ़ो के पुल बांध रहे है,अमरिका के सांसदो का शिष्ट मंडल आकर मोदीजी को मिलता है, ब्रिटन के सांसद मोदीजी को ब्रिटन के common house मे बोलने का निमंत्रण दे जाते है और औस्ट्रेलिया का राजदुत तो मोदीजी को औस्ट्रेलिया का दौरा करने को कहकर जाता है ,जिससे उपरी तौर पर ये दिखे की इन देशो ने मोदीजी का लोहा माना हो पर यह महज दिखावा भी हो सकता है.कारन इसी प्रकार इन देशो ने २००४ मे भी अटलजी की और उनके सरकार की तारीफ़े कर करके भाजपा को हवा मे चढा दिया था जिसका परीणाम ये हुआ कि भाजपा को सत्ता से हाथ धोना पडा .

२००४ के आम लोकसभा चुनाव मे ज्यादा नही भाजपा सिर्फ़ ९ सिटो से पिछे रही थी कांग्रेस से ,कांग्रेस-१४६ और भाजपा-१३७ यानी कांग्रेस को सत्ता स्थापन का न्योता मिला और कांग्रेस ने छोटी-बडी पार्टीय़ो के साथ मिलकर सत्ता बनायी मतलब साफ़ है की कांग्रेस को १ सिट भी भाजपा से ज्यादा हो तो सत्ता हासिल करने का मौका मिल जायेगा जो २००४ मे हुआ .

भाजपा को २००४ का दुख रहा है की अटलजी के अच्छे कामो के बावजुद सत्ता गयी शायद भाजपा को लगता होगा कि तहलका सिड़ि,शाइनिंग इण्डिया जैसा नकारत्मक प्रचार ही इसका कारण् होगा सत्ता जाने के लिये ? तो भाजपा को जानना पडेगा की यह भी एक पह्लु था जिससे देश के लोगो को गुमराह करने के लिये चलाया गया था और इस तहलका सिडि और शाइनिंग इण्डिया के पिछे विदेशियो संस्थाओ की हि नितिया काम कर रही थी जो सफ़ल भी हो सकी थी २००४ मे और इन संस्थाओ के आका यही देश है जो उस वक़्त अटलजी कि तारिफ़ कर रहे थे और आज मोदीजी की.

पर असली कमाल तो उस वक़्त यह था कि तहलका सिडि और शाइनिंग इण्डिया प्रचार की आड मे विदेशी ताक़ते भाजपा को सत्ता से दुर रखने के लिये अंदर से कांग्रेस को ज्यादा सिटे देने के काम मे लगी थी, जो भाजपा के जहन मे उस वक़्त आया हि नही होगा, क्यु की विदेशो मे अटलजी के सरकार कि स्तुति सुमन गाये जा रहे थे और अंदर से भाजपा को सत्ता से दुर रखने के लिये शतरंज की कौडिया बिछाइ जा रही थी विदेशो मे बैठे ताक़तो द्वारा.हलाकि विदेशियो को पता है की ,भारत मे भाजपा कि सत्ता होगी तो उनकी कुछ नही चल सकती पर कांग्रेस हो तो भारत से कई प्रकार के लाभ उठाये जा सकते है

अमरिका,ब्रिटन और औस्ट्रेलिया जैसी विदेशी ताक़ते चाहती है कि कांग्रेस सत्ता मे बनी रहे और भारत के प्राक्रुतिक संसाधनो का लाभ मिल जाये इन देशो को,वैसे ये देश भारत का हर द्रुष्टि से लाभ उठाना चाहेंगे जैसे अंतरराष्ट्रिय राजनिति ,सामरिक ,व्यापार ,आयात-निर्यात आदी जो कांग्रेस के राज मे हि मिल सकता है पर भाजपा के राज मे नही कारण भाजपा एक राष्ट्रवादि संघटन है जो विदेशी ताक़तो के हाथो का खिलोना नही बनना चाहती और ये इन विदेशी ताक़तो को गवारा नही होगा ,इसलिये इनको तो सिर्फ़ कांग्रेस की सत्ता ही पसंद रहेगी अपनी नितियो को चलाने हेतु.

इसलिये अबकी बार सावधान रहने की बेहद जरुरत है भाजपा और मोदीजी को.

Thursday, 13 June 2013

नितीश कुमार के लिए १९९६ के पहले अटलजी ,अडवानीजी और सुशिल मोदीजी जो साम्प्रदायिक थे पर वही तीनो १९९६ के बाद धर्मनिरपेक्ष कैसे बन गए ? तथा नितीश कुमार के लिए २००२ के बाद सिर्फ नरेन्द्र मोदीजी साम्प्रदायिक बन गए पर भाजपा मात्र धर्मनिरपेक्ष पार्टी कैसे बनी रही ?



देश की जनता को यह जानना होगा की , नितीश कुमार ऐसे राजीनीतिज्ञ है जो सत्ता में हमेशा बने रहने के खेल में माहिर है . १९९२ में नितीश कुमार जनता दल में थे और लालू प्रसाद यादव के साथी तथा तत्कालीन प्रधानमंत्री वि पि सिंह के मंत्री मंडल में कृषि राज्य मंत्री थे ,उसी काल में राममंदिर आन्दोलन उफान पर था तो इस आन्दोलन का विरोध करते हुए नितीश कुमार के तत्कालीन साथी और बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने राम मंदिर निर्माण के लिए जो रथयात्रा श्री लालकृष्ण अडवाणीजी के नेतृत्व में चल रही थी उसे बिहार में रोका था और श्री लालकृष्ण अडवाणीजी को गिरफ्तार किया था तब नितीश कुमार तत्कालीन अपने साथी लालू प्रसाद के साथ तो थे ही पर अडवाणीजी के भी विरोध में थे और तो और समाजवादी विचारो वाले नितीश कुमार संघ के भी विरोध में थे कारण हर समाजवादी मानता है की संघ जातीयवादी तथा धार्मिक संघठन है ,इसलिए श्री लालकृष्ण अडवाणीजी उसी संघ के स्वयंसेवक है एवं पूर्व में प्रचारक भी रहे थे इसलिए नितीश कुमार उनके भी विरोधक थे और अडवाणीजी को साम्प्रदायिक मानते रहे थे . पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी भी संघ के प्रचारक रहे है और भाजपा श्रेष्ठ नेता थे जो राम मंदिर आन्दोलन में सम्मिलित होने के कारण समाजवादि नितीश कुमार के नजरो में खलनायक रहे है इसलिए नितीश कुमार अटलजी के भी विरोधक थे और अटलजी को साम्प्रदायिक माना करते थे .इन्ही दोनों भाजपा के शीर्ष नेताओ की तरह बिहार के विद्यमान उपमुख्यमंत्री सुशिल कुमार मोदी भी संघ के प्रचारक रहे है और राममंदिर आन्दोलन में सक्रिय सामिल थे इसलिए नितीश कुमार उनके भी विरोधक रहे है उन्हें भी साम्प्रदायिक माना करते थे, पर भाजपा के इन तीनो नेताओ को नितीश कुमार ने १९९६ के पहले साम्प्रदायिक माना था ,कारण १९९६ के बाद नितीश कुमार की पार्टी ने भाजपा के साथ गठजोड़ किया था इसलिए १९९६ के बाद भाजपा के ये तीनो नेता नितीश कुमार के लिए धर्मनिरपेक्ष बने ....

नितीश कुमार भारतीय राजनीती में शातिर राजनीतिज्ञ माने जाते है ,जिन्हें सत्ता में बने रहने में महारत हासिल है जो १९९० से अब तक कुछ एक ५-६ साल छोड़ दिए जाए तो हमेशा सत्ता में शीर्ष के पद पर रहे है,१९५१ में जन्मे बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार को धर्मनिरपेक्षता के संस्कार और राजनीती के पाठ उनके पिताजी कविराज रामलखन सिंह से मिले हुए है जो १९५७ के पहले राष्ट्रीय कांग्रेस के बिहार में एक बड़े नेता थे तथा कांग्रेसी नेता अनुग्रह नारायण सिन्हा के कट्टर समर्थक(शिष्य ) थे ,पर १९५२ और १९५७ के आम चुनावो में कांग्रेस का टिकट ना मिलने के कारण कांग्रेस छोड़कर जनता पार्टी में सामिल हुए बाद में अपने सुपुत्र नितीश कुमार को भी जनता पार्टी में लाकर अपने गुरु अनुग्रह नारायण सिन्हा के पुत्र सत्येन्द्र नारायण सिन्हा से जोड़ दिया जो पूर्व में कांग्रेसी थे पर उस काल में जनता पार्टी बिहार राज्य के अध्यक्ष थे ......... फिर क्या अपने पिताजी की मदत से १९७५ में राजनितिक जीवन शुरू करने वाले नितीश कुमार १९८० में बिहार विधानसभा का चुनाव लड़कर हार गए बाद में १९८५ में विधायक बने ,१९८७ में बिहार युवा लोकदल के अध्यक्ष ,१९८९ में बिहार जनता दल के महामंत्री और लोकसभा सांसद ,१९९० में भाजपा के समर्थन पर चल रहे वि पि सिंह के मंत्रिमंडल में केंद्रीय कृषिराज्य मंत्री , १९९६ में भाजपा से गठबंधन करने के बाद १९९८ में अटलजी के मंत्रिमंडल में रेल मंत्री २००४ तक केंद्र में मंत्री बाद में २००५ में भाजपा की मेहरबानी से मुख्यमंत्री बने जो आज तक मुख्यमंत्री है .

नितीश कुमार जानते है की उन्हें जो अब तक सत्ता में जो बड़े बड़े पद मिले है वो गठबंधन की राजनीती के कारण .१९८९ से आज तक जो भी बड़ा पद प्राप्त हुआ है नितीश कुमार को वो गठबंधन की सरकारों में ,वे अपने पार्टी के माध्यम से अकेले सत्ता हासिल नहीं कर सके है ,उन्हें हर बार भाजपा का साथ लेना ही पड़ा उसमे भी उन्हें अटलजी ,अडवाणीजी और सुशिल मोदीजी का साथ मिला है जो गठबंधन की राजनीती को मानते है .इसलिए नितीश इन तीनो नेता को अपने हिसाब से धर्मनिरपेक्ष मानते होंगे .

पर नितीश कुमार ये भी जानते है की गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदीजी गठबंधन के राजनीती के बजाय शत प्रतिशत भाजपा की राजनीती पर ही चलते है ,उसका उदहारण यह है की मोदीजी १९८७ में संघ से भाजपा में आये गुजरात के संघठन महामंत्री के रूप में .मोदीजी ने पहला चुनाव व्यवस्थापन अहमदाबाद महानगरपालिका में अपने हाथ में लिया जिसमे भाजपा ने राज्य में मित्र पक्ष जनता दल को अहमदाबाद महानगरपालिका के चुनाव में साथ न लेकर खुद भाजपा का बहुमत हासिल किया और बाद में पुरे राज्य में भी यही प्रयोग जारी रखते हुए १९९५ में भाजपा को दो तिहाई बहुमत हासिल कराया , उसका परिणाम यह निकला की गुजरात राज्य से जनता दल खत्म हुआ तथा कांग्रेस ख़त्म होने की कगार पे है और आज ग भाजपा की अकेले दम पर आज तक गुजरात विधान सभा में बहुमत के साथ सत्ता है ,इसी १९८७ से १९९५ के बिच नितीश कुमार जनता दल में ही थे जिन्होंने अपने पार्टी को गुजरात में ख़त्म होते हुए देखा है मोदीजी के चुनाव रणनीति के कारण .

नितीश कुमार मानते है की अगर मोदीजी भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बन जाते तो स्वाभाविक रूप से मोदीजी के हाथ भाजपा की कमान आ जाएगी जिससे यह होगा की भाजपा के मित्र पक्ष जिसमे जदयु भी है वो सभी का अस्तित्व धोके में आ जाएगा और तो और अगर मोदीजी प्रधान मंत्री बन गए तो आने वाले १५ से २५ साल तक भाजपा की सत्ता बनी रहेगी जिससे भाजपा के सभी मित्र पक्ष शायद ख़त्म हो जायेंगे मोदीजी के लगातार प्रभाव के कारण .

इसलिए नितीश कुमार भाजपा के ऐसे नेताओ को समर्थन देना चाहते है जो गठबंधन की राजनीती के समर्थक है जिनमे अटलजी ,अडवाणीजी और सुशिल मोदीजी है जिन्हें धर्मनिरपेक्ष बताते है नितीश कुमार, पर नितीश कुमार को मोदीजी साम्प्रदायिक इसलिए दिखाई देते है कारण अगर मोदीजी को कमान मिलती है भाजपा की तो नितीश कुमार का अस्तित्व ही धोके में आता दिखाई देता है .......
 

Thursday, 21 February 2013

देश और दुनिया के मुस्लिम विद्वानों और धर्म गुरुओ के किसी भी सर्टिफिकेट की जरुरत नहीं है मोदीजी को , सर्टिफिकेट तो गुजरात के राष्ट्रवादी मुस्लिम भाइयो ने मोदीजी को दे दिया है ...........



कुछ मुस्लिम विद्वान् और धर्म गुरु ,देश और दुनिया में अपने कर्तुत्व से परचम लहरा रहे नरेन्द्र मोदीजी के द्वारा गुजरात में किये हुए विकास को तो अब कैसे वैसे मानने लगे है पर उस विकास को दुय्यम बताते हुए 2002 गुजरात के दंगो में दंगा पीड़ित लोगो को मिलने वाले इंसाफ को प्राथमिकता देकर कह रहे है की "वहां के विकास का क्या मतलब जहा इंसाफ नहीं " याने गुजरात में विकास तो रहा है पर अल्पसंख्यांक लोगो को इंसाफ नहीं मिल रहा है इस कारन मोदीजी के विकास के कोई मायने नहीं है ऐसा मुस्लिम विद्वानों और धर्म गुरुओ का मानना है .

अब इन विद्वानों और धर्म गुरुओ को कौन समजयेगा की देश भर में आजादी के बाद कांग्रेस और दुसरे पार्टियों(कम्युनिस्ट ,सपा ,बसपा ,जनता दल आदि ) के शासन काल में जितने दंगे हुए उनमे दंगा पीडितो को कितना इन्साफ मिला ये जानने की कोशिश क्यों नहीं की इन विद्वानों और धर्म गुरुओ ने ?2002 के दंगे के पूर्व गुजरात में जितने दंगे हुए जो कांग्रेस के काल में ही हुए थे ,उन दंगो में सिर्फ 4/5 से ज्यादा यफ आय आर भी दर्ज नहीं किये गए थे जबकि गुजरात 2002 में सभी जगहों में हुए दंगो में सम्मलित दंगाई यो पर हजारो केस तो दर्ज किया ही किया पर साथ में उनके खिलाफ साबुत भी पेश किये गए मोदीजी के सरकार ने ,जिससे अब तक सेकड़ो दंगायियो को सजा भी मिल चुकी है फिर उसमे मुस्लिम ही नहीं बल्कि मुस्लिमो से ज्यादा हिन्दू दंगाई भी है जिन्हें कड़ी सजा मिल चुकी है और कही तो न्यायलिन प्रक्रिया से गुजर भी रहे और उन्हें उनके गुनाह के लिए सजा भी मिलने वाली है ,इन सभी इन्सफो के बाद भी मुस्लिम विद्वान इन्साफ मिल रहा है ऐसा मानने को तयार नहीं है तो उनका दुर्भाग्य होगा पर गुजरात के मुस्लिमो का सौभाग्य जरुर है कारन उनको इन्साफ भी मिल रहा है और उनका विकास भी हो रहा है दुनिया में रह रहे सभी मुस्लिमो की तुलना में .......

आखिर,में इतना ही कहना चाहूँगा की मुस्लिम विद्वान और धर्मगुरुओ के सर्टिफिकेट की जरुरत नहीं है मोदीजी को ,आखिर सर्टिफिकेट तो गुजरात के उन राष्ट्रवादी मुस्लिमो ने दे ही दिया है मोदीजी को जिन्होंने 2002 दंगे में इन्साफ पाया है और विकास का भी अनुभव लिया है .......अब तक मुस्लिम भाइयो को धर्म के नाम पर राष्ट्र से अलग रखने वाले मुस्लिम विद्वान और धर्म गुरुओ को बहोत बड़ी चपट दे दी है मुस्लिम भाइयो ने राष्ट्रवाद के प्रवाह में सामिल होकर,गुजरात में मोदीजी को और गुजरात के मुस्लिम बहुल स्थानीय निकायों में भाजपा को बड़े तादात में वोट दिया और चुनकर लाया ......इससे बड़ा और कौनसा सर्टिफिकेट हो सकता है मोदीजी को ?